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विरोध और समर्थन की जनसुनवाई 14 को, जिंदल प्रबंधन और किसानों के संवाद के बीच रोड़ा बन रहे है स्वार्थीतत्व

रायगढ़: जिंदल पावर लिमिटेड (JPL) के प्रस्तावित कोयला ब्लॉक परियोजना को लेकर क्षेत्र में विरोध और समर्थन की गूंज के बीच 14 अक्टूबर को जनसुनवाई होने जा रही है। यह जनसुनवाई धौराभांठा के शासकीय मिडिल स्कूल के पास साप्ताहिक बाजार मैदान में आयोजित होगी। हालांकि, इस महत्वपूर्ण संवाद प्रक्रिया में कथित स्वयंभू राजनेता और दीगर उद्योगों में ठेका चलाने वाले ठेकेदारों की भूमिका ने किसानों और प्रबंधन के बीच एक नया रोड़ा डाल दिया है। जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। इन जटिलताओं के बीच, ऐसे लोगों के सक्रिय होने की खबरें हैं जो लोग रायगढ़ जिले के उद्योग कोयला खदान तथा अन्य परियोजनाओं में या तो ठेकेदारी करते हैं या फिर उनकी गाड़ियां उन कंपनियों में लगाकर मोटी कमाई कर रहे हैं। ऐसे लोग जनसुनवाई में काफी सक्रिय हो जाते हैं और किसानों को बहला-फुसलाकर उनके हितों को दरकिनार करके अपने लाभ के हिसाब से कंपनी प्रबंधन से समझौते कराने की कोशिश कर रहे हैं। ये कथित स्वयंभू राजनेता और दीगर उद्योगों में ठेका चलाने वाले ठेकेदारों कथित तौर पर प्रबंधन और किसानों के बीच दूरी बनाकर निजी फायदा उठाने के लिए दबाव बना रहे हैं। जिससे प्रभावित ग्रामीणों सही जानकारी और लाभ नहीं पाता है। अधिकांश ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि है वह उद्योग प्रबंधन से मुआवजा विस्थापन तथा रोजगार के संबंध में चर्चा करना चाहते हैं मगर उन्हें कुछ छुटभैय्ए राजनेता रोक रहे हैं।

*जनसुनवाई का महत्व*                   
 पर्यावरण नियमों के अनुसार, परियोजना से प्रभावित समुदायों से राय लेना अनिवार्य है। यह जनसुनवाई जिंदल प्रबंधन के लिए एक मौका है कि वह स्थानीय समुदायों की चिंताओं को खुले और पारदर्शी तरीके से संबोधित करे और परियोजना के लाभों एवं पर्यावरण सुरक्षा के उपायों पर स्पष्ट जानकारी दे। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इन कथित स्वयंभू राजनेता और दीगर उद्योगों में ठेका चलाने वाले ठेकेदारों के हस्तक्षेप को कैसे नियंत्रित करता है ताकि किसानों की आवाज बिना किसी दबाव के सीधे सुनी जा सके।

*ग्रामीणों को आगे कर जिंदल प्रबंधन पर बनाना चाहते हैं दबाव*।  
जब से जनसुनवाई की तारीख निश्चित हुई है कथित तौर पर देखा जा रहा है कि पूरे क्षेत्र में घूम घूम कर कुछ लोग जनसुनवाई में उद्योग प्रबंधन के खिलाफ माहौल खड़ा करना चाह रहे हैं। दरअसल इस विरोध और समर्थन के खेल में कुछ ऐसे लोग हैं जो दूसरे उद्योगों में ठेकेदारी और गाड़िया लगवा कर प्रति महीने लाखों रुपए कमा रहे हैं । ऐसे कथित नेता ठेकेदार और पर्यावरण प्रेमियों को असल में क्षेत्र के किसान और उनके हित ओर से कोई लेना-देना नहीं है वे केवल क्षेत्र के ग्रामीणों को आगे कर के उनका समझौता करने के नाम पर अपना स्वार्थ सिद्ध करना चाहते हैं उनका मकसद है कि किसी प्रकार उद्योग प्रबंधन दबाव में आ जाए और नए खदान या उद्योग में उनकी  ठेकेदारी और गाड़ियां चलती रहे।

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