छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओम प्रकाश चौधरी (ओपी चौधरी) ने अपने क्षेत्र को "एजुकेशन हब" बनाने का बड़ा दावा किया था। उनका खास प्रोजेक्ट नालंदा परिसर – प्रदेश का सबसे बड़ा (700 सीटर) आधुनिक 24x7 लाइब्रेरी, स्टडी जोन, कैफेटेरिया और सस्पेंशन ब्रिज – रायगढ़ में बन रहा है। यह NTPC लारा की CSR फंडिंग से हो रहा है, कुल 42.56 करोड़ रुपये का MoU 27 अक्टूबर 2024 को रायपुर में मंत्री चौधरी की मौजूदगी में साइन हुआ। मंत्री ने खुद कहा था: "यह नालंदा परिसर नई पीढ़ी के विकास में मील का पत्थर बनेगी। टेंडर की स्वीकृति दी जा चुकी है।"दिसंबर 2024 में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भूमिपूजन किया। जून 2025 में मंत्री चौधरी ने निर्माण का निरीक्षण कर जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। सब कुछ तेजी से आगे बढ़ रहा है –
लेकिन पारदर्शिता कहाँ है?मुख्य तथ्य और सवाल:टेंडर प्रक्रिया → अक्टूबर 2024 में टेंडर जारी (अनुमानित लागत ~19-27 करोड़), दिसंबर 2024 में वर्क ऑर्डर जारी, अनुबंध राशि 24.82 करोड़ रुपये।
ठेकेदार → M/s Deenak Mandev (प्रोप्राइटर: लखनलाल मिश्रा), । समय-सीमा: 18 महीने।
बड़ी समस्या → टेंडर की पूरी NIT, सभी बिडर्स की सूची, बोली राशि, तकनीकी-वित्तीय मूल्यांकन रिपोर्ट, ठेकेदार की पात्रता दस्तावेज़ (रजिस्ट्रेशन, PAN, GST, अनुभव) – ये कहीं सार्वजनिक नहीं।
#RTI का जवाब → नगर निगम रायगढ़ ने केवल #MoU और #work #Order दिया। बाकी जानकारी "उपलब्ध नहीं" बताकर टाल दी, कहा मुख्य रिकॉर्ड नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग (नवा रायपुर) के पास है।
जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के रायगढ़ जिला उपाध्यक्ष प्रिंकल दास (दृष्टिकोण NGO के संस्थापक सामाजिक कार्यकर्ता) ने इस मुद्दे को उठाया है। प्रिंकल दास लंबे समय से रायगढ़ में पारदर्शिता और जनहित के मुद्दों पर सक्रिय हैं। उनका सवाल सीधा है: "करोड़ों की CSR फंडिंग वाली परियोजना में पारदर्शिता क्यों नहीं? कितने बिडर्स थे? सबसे कम बोली किसकी थी? ठेकेदार का चयन कैसे हुआ? क्या कोई हितों का टकराव तो नहीं? "प्रिंकल दास कहते हैं: "मंत्री जी का प्रोजेक्ट युवाओं के लिए सराहनीय है, लेकिन जनता का पैसा और CSR फंड है – पूरी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। संदेह दूर करें, वरना यह सिर्फ घोषणाएँ बनकर रह जाएगा। "मंत्री जी, जनता जवाब मांग रही है:ओपी चौधरी ने रायपुर में नालंदा परिसर की शुरुआत की थी, जो अच्छा काम था। लेकिन अपने विधानसभा क्षेत्र में यह ड्रीम प्रोजेक्ट अब पारदर्शिता की कसौटी पर है। जब आप खुद MoU में मौजूद थे, टेंडर स्वीकृति की बात कर रहे थे, निरीक्षण कर निर्देश दे रहे हैं – तो:बिडर्स की लिस्ट क्यों नहीं सार्वजनिक?
मूल्यांकन रिपोर्ट क्यों छिपी?
ठेकेदार की पूरी पात्रता क्यों नहीं बताई जा रही?
प्रिंकल दास आर टी आई कार्यकर्ता और आम जनता चुनौती दे रही है: पूरी जानकारी तुरंत सार्वजनिक करें! अन्यथा यह संदेह बढ़ाएगा कि विकास के नाम पर पारदर्शिता क्यों दाँव पर लगी है?
रायगढ़ नालंदा परिसर में पारदर्शिता की कमी पर जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के जिला उपाध्यक्ष प्रिंकल दास ने मोर्चा खोल दिया है। प्रिंकल दास ने सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत नगर निगम रायगढ़ से टेंडर की पूरी NIT, बिडर्स की सूची, बोली मूल्यांकन रिपोर्ट, ठेकेदार की पात्रता दस्तावेज़ समेत 9 बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी मांगी थी।नगर निगम ने केवल MoU और Work Order दिया, बाकी सब “उपलब्ध नहीं” बताकर टाल दिया। प्रिंकल दास बोले – “ओपी चौधरी जी का ड्रीम प्रोजेक्ट है, तो जनता को पूरा हिसाब क्यों नहीं दिखाते? RTI में भी छिपाना क्या दर्शाता है?” 42 करोड़ की CSR परियोजना में पारदर्शिता न हो, तो युवाओं का सपना कैसे पूरा होगा?
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